दान का पुण्य प्रबल होता है: साध्वी मंगलप्रभा
रायपुर । राजधानी में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के अंतर्गत टैगोर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में साध्वी मंगलप्रभा ने सुख विपाक सूत्र की व्याख्या की।
इसमें बताया कि दान का पुण्य इतना प्रबल होता है, जो आत्मा को परमात्मा बना सकता है। सुख विपाक सूत्र में यही बताया गया कि कैसे लोगों ने दान देकर मनुष्यायु का बंध किया।
श्रावक के 12 व्रतों को अंगीकार किया, फिर साधु जीवन को अपनाकर अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने में सफल हो गए।
साध्वी मंगलप्रभा ने सुख विपाक सूत्र के तीसरे अध्याय का विवेचन करते हुए बताया कि जम्बू द्वीप में वीरपुर नगर था। वहां वीरकृष्णमित्र नाम के राजा राज करते थे।
उनकी रानी का नाम श्रीदेवी था। एक दिन रानी ने स्वप्न देखा, जिसमें एक केसरी सिंह उनके मुख में प्रवेश कर रहा था। रानी ने उठकर राजा को सब बता दिया।
राजा ने कहा, तुम्हारे गर्भ से कोई पुण्यशाली जीव जन्म लेगा। इस तरह सुजात कुमार का जन्म हुआ। दिवाकर दरबार के अंतर्गत साध्वी दिव्यांशी ने कहा कि आजकल रिश्ते बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह लोगों में विनय और विवेक की कमी है।
माता-पिता सपने पूरे करने के लिए अपने बच्चों को अच्छी पढ़ाई कराते हैं। विदेश भेजते हैं। शादी होते ही मां-पिता के प्रति सारा प्रेम खत्म हो जाता है।
नई आई पत्नी के लिए लोग उस मां को भी भूल जाते हैं, जिसने उन्हें नौ माह अपने गर्भ में पाला। जीवन में जो लोग विनय और विवेक को स्थान देते हैं, वे कभी इस तरह के कृत्य नहीं करते इसलिए अपने बच्चों पढ़ने के लिए विदेश भेजें न भेजें, लेकिन अच्छे संस्कार जरूर दें।
उन्हें धर्म-ध्यान सिखाएं ताकि उन्हें जीने का सही मार्ग पता चले।