धूमधाम से मनी भगतसिंह की जयंती

हमीरपुर। आजादी के अमृत महोत्सव की प्रासंगिकता को देखते हुये वर्णिता संस्था के तत्वावधान मे विमर्श विविधा के अन्तर्गत जरा याद करो कुर्बानी के तहत एक बेजोड़ क्रातिचेता भगतसिंह की 115वी जयन्ती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुये कहा कि भगतसिंह वास्तव मे देशपरायण थे, साथ ही आजादी के संघर्ष के निडर नाहर भी थे, उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है, हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातान्त्रिक संगठन रहा हो, सान्डर्स वध रहा हो या असेंबली बम कान्ड रहा हो,कहीँ पर भी भगतसिंह कमतर नहीं रहे।

भगतसिंह का 28 सितंबर 1907 को बंगा जिला लायलपुर पंजाब अब पाकिस्तान मे सरदार किशनसिंह, मा विद्यावती के घर हुआ था, भगतसिंह का परिवार राष्ट्र वादी था, इन्हें क्रातिधर्मी विचार विरासत मे मिले थे, असेंबली बमकांड मे भगतसिंह भगे नहीं, गिरफ्तार हुये, फासी की सजा मिली, 23 मार्च 1931 को लगभग 24 साल की उम्र राजगुरु और सुखदेव के साथ फासी के फन्दे पर झूल गये।

इस कार्यक्रम मे तीन शहीद हुये वीरों के परिवार वालों को सम्मानित किया गया, वर्णिता संस्था ने इस क्रम मायाराम प्रजापति, रामप्रताप व रामशरण प्रजापति को प्रतीक चिन्ह से अलंकृत किया, साथ ही संस्था ने अच्छी कार्य पद्धति एवं उत्कृष्ट प्रबंधन के लिए स्टेट बैक हमीरपुर के प्रबन्धक दिनेश कुमार को भी भी प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम मे अवधेश कुमार गुप्ता एडवोकेट, अशोक कुमार अवस्थी, राजकुमार सोनी, रमेश चन्द्र गुप्ता, मुन्नी चैरसिया, दिलीप अवस्थी, राधारमण गुप्ता, गौरीशंकर, सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

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