शहीद के माता-पिता जर्जर कच्चे मकान में रहने मजबूर

मंडला। बेटा तो अपनी डयूटी करते हुए शहीद हो गया। पर वृद्ध माता-पिता बेटा के बिना असहाय हो गए हैं। उनकी सुध नहीं ली गई। आज भी वे अपने गांव में कच्चे झोपड़ी वाले मकान में रहने मजबूर हैं। आज तक आवास योजना के तहत मकान तक नहीं बना।

समाज और सरकार ने भी सहारा नहीं दिया। माता-पिता की पीड़ा इतनी अधिक है कि वह कहते हैं कि ऐसा लगता है हमारा बेटा नहीं रहा तो अब हम भी नहीं हैं। हम झोपड़ी वाले जर्जर मकान में रहने मजबूर हैं।

शहीद के वृद्ध माता पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। बेटा जब शहीद हुआ था तब अधिकारी, नेता आए और उनकी मदद करने का आश्वासन दे गए। पर वे दावे अब धरातल में कहीं नहीं दिखाई दे रहे।

शहीद अशोक कुमार के माता-पिता निवास तहसील के कोहानी गांव में रहते हैं। शहीद के पिता रूपलाल उरैती व उनकी मां कच्चे मकान में रह रहे हैं। उनकी आर्थिक हालत अच्छी नहीं है। 2017 में बेटा के शहीद होने के बाद बड़ी मुश्किल से जीवन चल रहा है।

चार साल के करीब हो गए हैं। जर्जर मकान है, कच्ची दीवार है। फिर भी उनकी मदद के लिए कोई नहीं आया। मां की हालत भी ठीक नहीं है। मां के पैर का आपरेशन हो चुका है। जिससे उन्हें चलने फिरने में दिक्कत होती है।

पिता रूपलाल के एक आंख में मोतियाबिंद हो गया है। फिलहाल वे एक आंख से ही देख पा रहे हैं। केवल बड़े बेटे के सहारे वे रह रहे हैं। बड़ा बेटा जगदीश उरैती मजदूरी करके अपने माता-पिता और परिवार का पालन पोषण कर रहा है।

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