हमीरपुर : कोरोना ने छीनी प्राइवेट शिक्षको की रोजी रोटी

प्राइवेट शिक्षक 14 माह से दाने दाने को मोहताज

सुमेरपुर (हमीरपुर)। सरकारी नौकरी न मिल पाने से प्राइवेट विद्यालयों में शिक्षण कार्य करके अपनी जीविका चलाने वाले प्राइवेट शिक्षक कोरोना के चलते 14 माह से दाने दाने को मोहताज हैं, शिक्षण संस्थान बंद हैं, आमदनी के कोई साधन न होने के कारण अपने अपने घरों में बैठे हैं।

उनके परिवार भुखमरी के कगार पर जा पहुंचे हैं, सरकार की तरफ आशा भरी निगाहों से देखने वाले इन प्राइवेट शिक्षकों पर किसी को जरा भी दया नहीं आ रही, उनकी एक भी सहायता नहीं की जा रही है, जिसका उनमे भारी मलाल देखने को मिल रहा है।

गौरतलब है कि 25 मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते लांकडाउन लगा दिया गया था, शिक्षण संस्थाएं बंद कर दी गई थी, अभिभावकों के बच्चे आने बंद हो गए थे तो शुल्क भी मिलना बंद हो गया था, प्राइवेट शिक्षक घरों पर बैठने पर विवश हो गए थे, अब धीरे-धीरे 14 माह का समय बीत गया है ।

कई प्राइवेट शिक्षकों ने बताया कि उनकी हालत मजदूरों से भी बदतर है मजदूर तो कहीं न कहीं काम करके कुछ न कुछ हासिल कर लेते हैं लेकिन उनकी हालत तो यह है कि कहीं से भी आय के कोई साधन नहीं है।

ऐसे हालातों में यदि सरकार प्राइवेट शिक्षकों का सर्वे कराकर किसानों की तरह उन्हें भी कुछ ना कुछ सहायता उपलब्ध करा देती तो उन्हें सुकून मिल जाता लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा इन शिक्षकों की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण उनका बुरा हाल हो गया है।

प्राइवेट शिक्षको ने बताया कि सरकार के द्वारा उनकी सहायता के नाम पर कुछ भी न करके उनकी भारी उपेक्षा की जा रही है जिसका उन्हें सदैव मलाल रहेगा।

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