इन तीन चीजों को प्राप्त करने में व्यक्ति को नहीं गंवाना चाहिए समय

व्यक्ति को इन चीजों के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए. विपरित परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति सुख के साधन खोज लेता है वही असली इंसान कहलाता है. आचार्य चाणक्य के अनुसार इन तीन चीजों को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को समय नहीं गंवाना चाहिए.

विष से अमृत लेना चाहिए

चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को विष यानि जहर से भी अमृत हासिल करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए. इसका अर्थ ये है कि व्यक्ति को विष में अगर अमृत नजर आए तो उसे छोड़ना नहीं बल्कि ग्रहण करने का प्रयाय करना चाहिए. यानि अगर प्रतिभा कीचड़ में भी है तो उसे अपनाने से किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतनी चाहिए.

गंदगी से भी सोना लेने से नहीं कतराना चाहिए

सोना कीमती है सभी जानते हैं. गंदगी से भी अगर सोना प्राप्त करने का अवसर आए तो व्यक्ति को इस अवसर को छोड़ना नहीं चाहिए. इस नीति के प्रति आचार्य चाणक्य का तत्पार्य ये है कि व्यक्ति को अच्छी वस्तु प्राप्त करने के लिए उसके स्थान पर ध्यान नहीं देना चाहिए. व्यक्ति को ऐसी वस्तु पाने के लिए हमेशा प्रयत्न करते रहना चाहिए.

ऐसी स्त्री को अपनाएं

स्त्री गुणी और सुंदर हो फिर चाहे वह गरीब घर में ही क्यों न हो ऐसी स्त्री को अपनाने से गुरेज नहीं करना चाहिए. अच्छी स्त्री की महत्व को लेकर आचार्य चाणक्य का कथन है कि अगर दुश्मन के घर में अगर सुशील स्त्री है तो उससे रिश्ता जोड़ने में अंहकार का परित्याग कर देना चाहिए. क्योंकि सुशील, गुणों से पूर्ण स्त्री जिस घर में भी जाएगी उस घर की शोभा बढ़ाएगी

 

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