इंदौर बना cका मुख्य केंद्र, 2 साल में शुरू हुए 44000 उद्यम

इंदौर जिला वर्तमान में औद्योगिक क्रांति के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों के दौरान इंदौर में औद्योगिक गतिविधियों में भारी उछाल आया है। महाप्रबंधक स्वप्निल गर्ग ने जानकारी दी है कि जिले में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से हजारों नए उद्यमियों को सहायता प्रदान की गई है। पिछले तीन वर्षों के भीतर इंदौर में पंद्रह नए औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए हैं, जिनमें सात सौ से अधिक नई इकाइयां आकार ले रही हैं। इन नए उद्योगों के माध्यम से लगभग बीस हजार युवाओं के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

औद्योगिक विस्तार और निवेश का प्रमुख केंद्र बन रहा इंदौर
गर्ग ने कहा कि इंदौर अपनी बेहतर औद्योगिक संस्कृति, कुशल श्रमिकों की उपलब्धता और मजबूत कनेक्टिविटी के कारण निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला बनाने के बजाय नौकरी देने वाला उद्यमी बनाना है। इसके लिए प्रदेश में निरंतर उद्योग मित्र नीतियां लागू की जा रही हैं, जिससे निवेश की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हुई है।

लॉजिस्टिक और रेलवे नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव आएगा
आने वाले तीन से चार वर्षों में इंदौर देश के एक बड़े रेलवे हब के रूप में पहचाना जाएगा। वर्तमान में यहां से संचालित होने वाली ट्रेनों की संख्या सौ से कम है, जिसे बढ़ाकर तीन सौ तक करने की योजना है। छह अलग-अलग दिशाओं में सशक्त रेल कनेक्टिविटी के साथ-साथ सड़क नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। इंदौर की सात सौ किलोमीटर की परिधि में देश की साठ प्रतिशत आबादी के आने से लॉजिस्टिक लागत में बड़ी कमी आएगी। सरकार का लक्ष्य वर्तमान चौदह प्रतिशत की लॉजिस्टिक लागत को घटाकर सात से आठ प्रतिशत तक लाना है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

महिला उद्यमिता में सकारात्मक नतीजे
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान कुल नौ सौ चौंसठ उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। विशेष रूप से महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई विभाग द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप तीन सौ एक महिला उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत कुल तीन सौ इकतालीस इकाइयों को तीन सौ अट्ठाइस करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की जा रही है, जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में एक बड़ा कदम है।

शत-प्रतिशत उद्योग ग्राम पंचायत वाला जिला बना इंदौर
इंदौर जिले ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2024-25 की शुरुआत में जिले की एक सौ नवासी ग्राम पंचायतें उद्योग विहीन थीं। प्रशासन और उद्योग विभाग के समन्वित प्रयासों से इन सभी पंचायतों में सूक्ष्म उद्योग स्थापित किए गए हैं। अब इंदौर की सभी तीन सौ चौंतीस ग्राम पंचायतों में उद्योग संचालित हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर दो हजार से अधिक ग्रामीणों को रोजगार मिला है। उद्यम पंजीयन के क्षेत्र में भी जिले ने रिकॉर्ड बनाया है, जहां पिछले दो वर्षों में कुल चौवालीस हजार पांच सौ एक उद्यमों का पंजीयन हुआ है, जिनसे एक लाख सत्तर हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।

जरूरी आंकड़े…
44 हजार 501 उद्यमों का पंजीयन इंदौर जिले में पिछले दो वर्षों के सफल कार्यकाल के दौरान किया गया है।
1 लाख 70 हजार 678 लोगों को निर्माण एवं सेवा क्षेत्र की गतिविधियों के विस्तार से रोजगार प्राप्त हुआ है।
15 नए इंडस्ट्रियल पार्क पिछले तीन वर्षों में इंदौर जिले की सीमाओं के भीतर स्थापित किए गए हैं।
328.50 करोड़ रुपये से अधिक का कुल अनुदान एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत विभिन्न इकाइयों को स्वीकृत हुआ है।
300 तक इंदौर में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है जो वर्तमान में 100 से भी कम है।
60 प्रतिशत देश की आबादी इंदौर के 700 किलोमीटर के सड़क नेटवर्क दायरे में भविष्य में आ जाएगी।

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