बिहार के इस गांव में 75% घरों में नहीं बनती दाल और सब्जी, वजह जानकर चौंक जाएंगे
बिहार में स्वतंत्रता के इतने दिनों बाद भी एक ऐसा गांव है जहां के 75 फीसदी परिवारों में दाल और सब्जी नहीं बनती है। यह गांव है कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड का बड़गांव खुर्द। यहां की 75 प्रतिशत आबादी मजदूरी कर जीवनयापन कर रही है। इनके घरों में हरी सब्जी और दाल नहीं पकती। इनमें से कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें रोज काम नहीं मिल पाता है। यहां शहर की अपेक्षा मजदूरी भी कम ही मिल पाती है। मजदूर परिवार किसी तरह गुजर-बसर कर रहा है। जन वितरण प्रणाली की दुकान से चावल-गेहूं मिल जाता है, जिससे उन्हें अनाज का प्रबंध करने की कोई खास चिंता नहीं रहती।
अधौरा प्रखंड के बड़गांव खुर्द के 65 वर्षीय जागरूप उरांव बताते हैं कि उन्हें याद ही नहीं है कि उनके घर में कब दाल और हरी सब्जी पकी है। परिवार में सात सदस्य हैं। बड़े भाई मुंशी उरांव बीमार रहते हैं। उनके लिए दवा का इंतजाम करना जरूरी है। जागरूप की हड्डी अब उतनी मजबूत नहीं रही, जिसके बल पर वह मजदूरी कर सकें। उनका बेटा चिंटू उरांव दूसरे शहर में रहकर मजदूरी करता है। उसी की कमाई से घर से खर्च चलता है।
जागरूप बताते हैं कि वह, उनकी पत्नी जट्टा देवी और भाभी शनिचरी देवी सभी वृद्ध हैं। उनसे मजदूरी नहीं हो पाती है। दो बेटी मीना कुमारी व अंजू कुमारी हैं। पूछने पर जागरूप ने बताया कि कहां से दाल-सब्जी का इंतजाम करें। एक कमाने वाला और सात खाने वाले हैं। माड़-भात, कुचला, हरी मिर्च कुछ भी खा लेते हैं। 70 वर्षीय राजदेव उरांव कभी शरीर से काफी मजबूत थे। तब मनरेगा में सबसे ज्यादा काम करते थे और मजदूरी अच्छी मिल जाती थी। लेकिन, अब हड्डी कमजोर हो गई। एकमात्र पुत्र कमला उरांव की कमाई से घर का खर्च चलता है। जागरूप और राजदेव जैसे छोटेलाल उरांव, विजय खरवार, भरत खरवार आदि के भी परिवार जैसे-तैसे गुजर-बसर कर रहे हैं।