उत्थान-पतन की सीख

पूनम के चांद को देखकर शिष्य ने अपने गुरु से पूछा, ‘गुरुदेव, पन्द्रह दिनों तक तो चांद की आभा बढ़ती है, लेकिन फिर बाद में घटने लगती है। इसका क्या रहस्य है?’ गुरु बोले, ‘वत्स, कुदरत इन चन्द्र कलाओं से हमें जीवन में उत्थान-पतन की सीख देती है।

‘ शिष्य उत्सुकता से बोला-वह कैसे गुरुवर? गुरुदेव ने कहा, ‘चांद का बढ़ना-घटना, हमें यह बताता है कि व्यक्तित्व के विकास से लोग न केवल स्वयं प्रकाशमान होते हैं, बल्कि संसार को भी प्रकाशित कर देते हैं। जबकि पतन की ओर उन्मुख व्यक्ति क्षीण होकर अज्ञान के अंधकार में गिरकर नष्ट हो जाते हैं।’

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