Vodafone Idea के शेयरों में बड़ी तेजी, वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के बीच नया समझौता

वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर के बीच नए एग्रीमेंट के तहत, वोडाफोन ग्रुप के प्रमोटर अमेंडमेंट एग्रीमेंट में तय शर्तों के अनुसार अगले 12 महीनों में वोडाफोन आइडिया के लिए 2,307 करोड़ रुपये जारी करेंगे। इस खबर के बाद कंपनी के स्टॉक 8 फीसदी त उछल गए।

वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea Shares) के शेयर साल के पहले दिन 1 जनवरी को 8 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए। शेयरों में यह तेजी उस रेगुलेटरी फाइलिंग के बाद आई, जिसमें टेलीकॉम कंपनी को लायबिलिटी क्लेम समझौते के री-सेटलमेंट के तहत वोडाफोन ग्रुप से लगभग 5,836 करोड़ रुपये मिलेंगे। नए एग्रीमेंट के तहत, वोडाफोन ग्रुप के प्रमोटर अमेंडमेंट एग्रीमेंट में तय शर्तों के अनुसार अगले 12 महीनों में वोडाफोन आइडिया के लिए 2,307 करोड़ रुपये जारी करेंगे। वोडाफोन ग्रुप ने Vi में रखे अपने 328 करोड़ शेयर भी Vi के फायदे के लिए अलग रख दिए हैं।

1 जनवरी को वोडाफोन आइडिया के शेयर 11.26 रुपये पर खुले 11.76 रुपये का हाई लगा दिया। 31 दिसंबर के कारोबारी सत्र में इस टेलिकॉम कंपनी के शेयरों में जबरदस्त वॉलेटिलिटी देखने को मिली। सुबह शेयर 3 फीसदी तक चढ़ गया, लेकिन दोपहर में 15 प्रतिशत की गिरावट आ गई।

वोडाफोन आइडिया के शेयरों में तेजी क्यों आई?

वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के बीच 2017 के मर्जर एग्रीमेंट के समय वोडाफोन ग्रुप और वोडाफोन आइडिया (Vi) के बीच एक कंटिंजेंट लायबिलिटी एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CLAM) किया गया था और यह दोनों मर्ज होने वाली पार्टियों के कानूनी, रेगुलेटरी, टैक्स और अन्य मामलों से संबंधित मर्जर से पहले की कंटिंजेंट लायबिलिटीज को कवर करता है।

CLAM के तहत, मर्जर के समय वोडाफोन का अधिकतम एक्सपोजर 8,369 करोड़ रुपये तय किया गया था और पहले से किए गए पेमेंट को ध्यान में रखते हुए, कम किया गया एक्सपोजर 6,394 करोड़ रुपये तय किया गया था और एक्सटेंशन के बाद इस समझौते की डेडलाइन 31 दिसंबर, 2025 थी।

यह तब हुआ जब यूनियन कैबिनेट ने कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया पर पांच साल की रोक को मंज़ूरी दे दी। कैबिनेट ने 31 दिसंबर को वोडाफोन आइडिया के AGR बकाए को 31 दिसंबर तक 87,695 करोड़ रुपये पर फ्रीज करने और FY2032-41 के दौरान रीपेमेंट को रीशेड्यूल करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। सरकारी सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि इस फैसले से सरकार द्वारा नियुक्त पैनल द्वारा बकाए का फिर से आकलन करने की भी अनुमति मिलती है।

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