एंड्रॉइड डिवाइस का करते हैं इस्तेमाल तो फेक ऐप से रहें सतर्क, इस तरह करें सुरक्षित

नई दिल्ली, हाल में केंद्र सरकार ने 14 ऐसे मैसेजिंग एप को बैन कर दिया, जिनका प्रयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। गूगल ने भी अपनी हालिया सिक्योरिटी रिपोर्ट में दावा किया है कि उसने यूजर सुरक्षा और निजता के लिए खतरा बन रहे लाखों एप्स बैन कर दिए हैं। इनमें 3500 ऐसे लोन एप भी हैं, जो भारत में नियमों के विपरीत संचालित हो रहे थे। इस संदर्भ में जानते हैं किसी एप को इंस्टाल और अनइंस्टाल करने और डिवाइस को फेक एप से सुरक्षित रखने के कुछ जरूरी उपायों के बारे में…

एंड्रायड वैसे तो दुनिया का सबसे लोकप्रिय आपरेटिंग सिस्टम है। इसके व्यापक और ज्यादातर ओपेन एप्लीकेशन इकोसिस्टम हैं, यही कारण है कि अलग-अलग तरह के कार्यों के लिए यह बड़े स्तर पर प्रयोग में लाया जाता है। लेकिन जब बात सुरक्षा और यूजर की निजता की आती है, तो यह किसी आपदा से कम नहीं है। एप के जरिये होने वाली धोखाधड़ी के सवालों पर गूगल लगातार घिरता रहा है।यही वजह है कि गलत मंशा से तैयार एप्स को प्रतिबंधित करने की मांग लगातार होती रही है, ताकि बड़े स्तर पर यूजर के हितों को सुरक्षित रखा जा सके।

सरकार ने बंद किए 14 मैसेजिंग ऐप

हाल में केंद्र सरकार ने 14 ऐसे मैसेजिंग एप को बैन कर दिया है, जिनका प्रयोग जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। खास बात है कि ये एप्स गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर पर उपलब्ध थे, जिनके डाउनलोड भी लाखों में थे। इससे पहले गूगल ने अपनी वार्षिक प्ले प्रोटेक्ट रिपोर्ट में 14 लाख से अधिक एप को प्रतिबंधित करने का दावा किया था।

मालवेयर से यूजर की सुरक्षा

गूगल प्ले प्रोटेक्ट की हालिया रिपोर्ट में दावा है कि दुनियाभर में प्रतिदिन करोड़ों डिवाइस में बड़ी संख्या में इंस्टाल किये जाने वाले एप्स गूगल प्ले प्रोटेक्ट के जरिये स्कैन किए जाते हैं, ताकि एंड्रायड डिवाइसेज को मालवेयर और अवांछित साफ्टवेयर के खतरों से बचाया जा सके। दरअसल, गूगल प्ले प्रोटेक्ट ऐसा सिस्टम है, जिससे दुर्भावना से तैयार एंड्रायड एप्स और डिवाइस के जोखिमों की लगातार जांच की जाती है। जब आप किसी एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करते हैं, तो उससे पहले यह सेफ्टी चेक करता है। हानिकारक एप से यूजर को यह ना केवल आगाह करता है, बल्कि यूजर की डिवाइस से उसे डिएक्टिवेट कर या हटा भी सकता है।

मशीन लर्निंग से बढ़ती सुरक्षा

नये और बेहतर सुरक्षा फीचर तथा नीतियों में परिवर्तन के चलते गूगल ने प्ले स्टोर पर ऐसे 14.3 लाख एप्स को पब्लिश होने से रोक दिया, जो नियमों और शर्तों के अनुकूल नहीं थे। इस कार्य के लिए गूगल, मशीन लर्निंग सिस्टम को बेहतर बना रहा है और एप रिव्यू प्रक्रिया में सुधार रहा है। गूगल ने 1.73 लाख खतरनाक एकाउंट को भी बैन कर दिया है, ताकि मैलिसियस डेवलपर और फ्राड रिंग्स गलत तरह के एप्स को पब्लिश ना कर सकें। साथ ही, पांच लाख ऐसे एप्स को रोका गया है, जो पिछले तीन वर्ष से अनावश्यक रूप से यूजर्स के संवेदनशील डाटा की चोरी कर रहे थे।

भारत में लोन एप को लेकर बड़ी कार्रवाई

गूगल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उसने 2022 में भारत में 3500 लोन एप्स को प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बाद भारत सरकार ने भी इस वर्ष फरवरी में अवांछित तौर पर संचालित 94 लोन एप को प्रतिबंधित कर दिया था, इसमें ज्यादातर चीनी कंपनियों से जुड़े हुए थे। हालांकि जांच के बाद 10 एप्स को प्रतिबंधों से राहत दे दी गई थी। गूगल का दावा है कि इस तरह के एप्स को लेकर विशेष रूप से निगरानी तंत्र विकसित करके एप्स पर कार्रवाई की प्रक्रिया को सख्त किया गया है।

सुरक्षित रखें अपने ऐप्स और डाटा

आप गूगल प्ले प्रोटेक्ट की मदद से अपने एप्स और डिवाइस को मालवेयर के खतरों से बचा सकते हैं।

डिवाइस सर्टिफिकेशन को वेरिफाइ करें : इसके लिए गूगल प्ले स्टोर एप को ओपेन करें। ऊपर दाईं ओर प्रोफाइल आइकन पर टैप करें। इसके बाद सेटिंग में अबाउट सेक्शन में जाकर चेक करें कि आपकी डिवाइस प्ले प्रोटेक्ट सर्टिफाइ है या नहीं।

गूगल प्ले प्रोटेक्ट को टर्न आन करें : डिफाल्ट तौर पर यह टर्न-आन होता है, लेकिन इसे आप आफ भी कर सकते हैं। सुरक्षा के नजरिये से इसे आन ही रखें। इसके लिए प्ले स्टोर एप में प्रोफाइल आइकन पर जाकर प्ले प्रोटेक्ट पर टैप करें, सेटिंग में स्कैन एप्स विद प्ले प्रोटेक्ट को टर्न आन करें।

अवांछित एप को गूगल को भेजें : अगर आपने अज्ञात स्रोत से किसी एप को डाउनलोड कर लिया है, तो गूगल प्ले प्रोटेक्ट आपसे अज्ञात एप को गूगल को भेजने के लिए पूछ सकता है। सेटिंग में जाकर इसे आप इसे आटोमैटिक भी कर सकते हैं। इसके लिए गूगल प्ले स्टोर के प्रोफाइल आइकन पर टैप करें, फिर प्रोफाइल प्रोटेक्ट की सेटिंग में जाएं, यहां इंप्रूव हार्मफुल एप डिटेक्शन को आन कर दें।

कैसे बचें मालवेयर से

  • कोई भी एप हमेशा आधिकारिक स्रोत से ही डाउनलोड करें।
  • डाउनलोड करने से पहले एप के रिव्यू जरूर पढ़ें।
  • फ्री एंटीवायरस के ट्रायल से बचें, क्योंकि उसमें मालवेयर भी हो सकता है।
  • सिक्योरिटी साफ्टवेयर को इंस्टाल और अपडेट करें।
  • ई-मेल और टेक्स्ट मैसेज में किसी लिंक पर क्लिक करने से बचें।
  • सार्वजनिक स्थानों पर ब्लू-टूथ कनेक्टिविटी को डिसेबल करके रखें।
  • एंटी-मालवेयर साफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।
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