भारतीय किसान यूनियन- लोकशक्ति ने नए कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

नई दिल्ली: भारतीय किसान यूनियन ने नए कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए इनके खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई की मांग की है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ विभिन्न किसान संगठन दिल्ली की सीमाओं पर कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। बीकेयू  ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में दावा किया है कि नए कृषि कानून कारपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाले हैं। इनमें किसानों के हित की चिंता नहीं की गई है।

वकील एपी सिंह के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि नए कानून असंवैधानिक और किसान विरोधी हैं। ये कानून कृषि उत्पाद बाजार समिति प्रणाली को नष्ट कर देंगे, जिनका उद्देश्य किसानों की उपज को न्यायसंगत मूल्य सुनिश्चत करना है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा स्वरूप में इन कानूनों को लागू किया जाना कृषक समुदाय के लिए खतरनाक होगा, क्योंकि इससे एक समानांतर बाजार व्यवस्था शुरू हो जाएगी, जिसका कोई नियम-कानून नहीं होगा।

याचिका में यह भी कहा गया है कि कृषि कानूनों के जरिए किसानों का शोषण आसान हो जाएगा। याचिका के अनुसार, किसानों में इस बात का डर है कि इन कानूनों से पूरे कृषि बाजार का व्यावसायीकरण हो जाएगा और कारोबारी अपनी इच्छा से कीमतें घटा-बढ़ा सकेंगे। वहीं दूसरी ओर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में से एक याचिकाकर्ता 40 से ज्यादा किसान यूनियनों को पक्षकार बनाने की मांग की है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि किसान कृषि-विरोधी क़ानूनों के ख़िलाफ आंदोलन कर रहे हैं। इस सत्याग्रह में हम सबको देश के अन्नदाता का साथ देना होगा। वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि राहुल गांधी को कांग्रेस भी गंभीरता से नहीं लेती तो देश का सवाल ही नहीं उठता। आज जब वे राष्ट्रपति को विरोध व्यक्त करने गए तब कांग्रेस से कोई भी नेता किसानों से हस्ताक्षर करवाने नहीं आया और न किसानों ने हस्ताक्षर किए।

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