मानसून के असामान्य बर्ताव ने पहाड़ी राज्यों की बढ़ा दी चिंताएं, पढ़े पूरी खबर

मानसून के असामान्य बर्ताव ने पहाड़ी राज्यों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। खासकर उत्तराखंड में इस बार आपदा का खतरा ज्यादा बना हुआ है। मौसम के अजीबो-गरीब रूप के पीछे अरब सागर से हिमालय की ओर आने वाले प्रवाह का अनियमित होना है। जिससे यहां बादलों के बरसने की क्षमता प्रभावित हो रही है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक अरब सागर की ओर से आने वाले चक्रवातों के प्रवाह में कमी के कारण हिमालयी क्षेत्रों में मानसून में विविधता देखी जा रही है। यही कारण है कि इस बार हिमाचल और उत्तराखंड में बारिश अनियमित रूप से हो रही है। जबकि, उत्तर पूर्व के मैदानी राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश हो रही है। इसके अलावा क्लाइमेट वेरिएबिलिटी पूरे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ गई है।

बारिश की तीव्रता भी अनियमित हो गई है। बारिश पॉकेट्स में हो रही है। किसी एक जगह बादल इकट्ठा होते हैं और अत्यधिक भारी वर्षा से बादल फटने जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। बारिश का सामान डिस्टिब्यूशन नहीं है। गर्मियों में हीट वेव बढ़ने से घाटियां और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गर्मी बढ़ रही है। जिसका असर जलवायु में आ रहे बदलावों पर पड़ता है। इस बार बादल फटने या अतिवृष्टि की घटनाओं की आशंका और बढ़ गई है।

ऐसे बनती है बादल फटने जैसी स्थिति 

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, वायुमंडल में नीचे से उठने वाली गर्म  आर्द्र हवाएं बादलों से टकराकर ठंडी हवाओं को पानी की बूंदों में बदल देती हैं। जिससे अतिवृष्टि के हालात बन जाते हैं या बादल फटने जैसी स्थिति मानी जाती है। मौसम विज्ञान केंद्र की भाषा में यदि बारिश की गति एक घंटे में 115 मिलीमीटर हो तो उसे बादल फटना माना जाएगा। उदाहरण के तौर यदि एक वर्ग किलोमीटर इलाके में आधे घंटे में 50 मिलीमीटर पानी बरसे तो उस पानी का भार 50,000 मीटिक टन होगा। पानी की यह मात्रा एक स्थान पर अचानक बाढ़ के रूप में आगे बढ़ती है और रास्ते में पड़ने वाले अवरोधों को बहाकर ले जाती है।

कुमाऊं में काल बना मानसून 

इस बार कुमाऊं में मानसून की सक्रियता अधिक रही है। हालांकि, अब वहां भी बारिश की आवृत्ति कम हो गई है। लेकिन, बीते दिनों पिथौरागढ़ में बादल फटने से आधा दर्जन से अधिक जानें चली गईं और संपत्ति का भी नुकसान हुआ। यही नहीं, बागेश्वर, चंपावत, पौड़ी गढ़वाल में भी बादल फटने की घटनाएं या अतिवृष्टि हो चुकी है। मौसम के मिजाज के अनियमित होने से अतिवृष्टि की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

लगातार बढ़ रही बादल फटने की घटनाएं

वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक पीएस नेगी बताते हैं कि बादल फटने की घटनाएं पिछले दस वर्ष में बढ़ीं हैं। उत्तराखंड में पहले भी बादल फटते थे, लेकिन ऐसी घटनाएं दुर्गम इलाकों में या सघन वन क्षेत्रों में ही हुआ करती थीं। जिससे नुकसान भी इतना अधिक नहीं होता था। लेकिन, ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं और शहरी क्षेत्रों में भी होने लगी हैं। कुछ अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक टिहरी बांध के अस्तित्व में आने के बाद इस तरह की घटनाओं में इजाफा हुआ है। टिहरी में भागीरथी नदी पर करीब 260.5 मीटर ऊंचा बांध बना है। जिसका जलाशय करीब चार क्यूबिक किलोमीटर है जो 32 लाख एकड़ फीट में फैला है। यह भी तेजी से बादल बनने में मदद करता है और दबाव पड़ने पर फटने की आशंका भी।

चीन सीमा को जोड़ने वाले तीन मार्ग पांच दिन से बंद

उत्तराखंड में पहाड़ी जिले मौसम की मार झेल रहे हैं। बारिश के कारण हो रहे भूस्खलन से प्रदेशभर में 60 से अधिक मार्ग बाधित हैं। कुमाऊं में चीन सीमा को जोड़ने वाले तीन मार्ग पांच दिन से बंद हैं। इससे स्थानीय बाशिंदों के साथ अर्धसैनिक बलों को भी दिक्कत हो रही है। इधर, बुधवार को गढ़वाल में गंगोत्री-यमुनोत्री और बदरीनाथ मार्ग भी घंटों बाधित रहे। हालांकि, मैदानी जिलों में मौसम ने कुछ राहत दी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो से तीन दिन प्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर धीमा रह सकता है। हालांकि, अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।

बारिश और भूस्खलन के कारण कुमाऊं टनकपुर-तवाघाट हाईवे, तवाघाट-सोबला-तिदांग मार्ग बंद रहा। इस बीच चीन सीमा को जोड़ने वाला तवाघाट-घटियाबगड़-लिपुलेख मार्ग पर भी आवाजाही नहीं हो सकी। यहां दराती-मटियाली, डीडीहाट-थल, थल-मुनस्यारी मार्ग भी जगह-जगह बाधित है। मदकोट-बसंतकोट, मदकोट-बौना, तल्ला घोरपट्टा-जैंत, छिरकिला-जम्कू, मदकोट-तौमिक-गैला, गिनी बैंड-समकोट और नाचनी-बांसबगड़ मार्ग पर भी बुधवार को आवाजाही नहीं शुरू हो सकी। गढ़वाल में गंगोत्री हाईवे सात घंटे, यमुनोत्री हाईवे आठ घंटे बाधित रहा। जबकि, बदरीनाथ मार्ग पर भी चार घंटे आवाजाही ठप रही। प्रदेश के अधिकांश इलाकों में दिनभर बादल छाये रहे और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश के एक से दो दौर हुए।

अगले तीन दिन सुस्त रहेगा मानसून

उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक प्रदेश में मानसून की रफ्तार अगले तीन दिन सुस्त रहेगी। बताया कि 23 से 25 जुलाई के बीच पिथौरागढ़, चंपावत, उत्तरकाशी, बागेश्वर, नैनीताल के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जबकि, देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी में कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ने की संभावना है।

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