उत्तराखंड में रिकवरी रेट दे रहा है सुकून, रोज कोरोना के नए मामले भी आ रहे सामने

उत्तराखंड में रिकवरी रेट जरूर सुकून दे रहा है, पर हर रोज कोरोना के नए मामले भी सामने आ रहे हैं। इन हालात में भविष्य के जोखिम को कम करने के लिए अधिकाधिक टेस्टिंग ही एकमात्र रास्ता है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रदेश में कोरोना की दस्तक होने के बाद से हर अंतराल पर जांच का दायरा बढ़ा है। साथ ही मेडिकल कॉलेजों में अब चौबीस घंटे जांच की जा रही है। पर अन्य हिमालयी राज्यों से तुलना करें तो यह इंतजाम अब भी नाकाफी ही दिख रहे हैं। प्रति एक लाख आबादी पर सैंपलिंग को आधार माना जाए तो ग्यारह हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड फिसड्डी साबित हुआ है। यहां तक कि पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी राज्य से आगे है।

हिमालयी राज्यों में यद्यपि लद्दाख की जनसंख्या कम है, पर प्रति लाख की आबादी से हुई सैंपलिंग में नंबर वन पर है। जम्मू-कश्मीर दूसरे व मणिपुर तीसरे स्थान पर है। लेकिन इस सूची में उत्तराखंड दसवें पायदान पर है। क्योंकि प्रति एक लाख की आबादी पर यहां अब तक 922 लोगों के ही सैंपल लिए गए हैं। सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष अनूप नौटियाल के अनुसार पिछले दो माह से उत्तराखंड में जांच की रफ्तार बढ़ी है।

अब रोजाना दो से ढाई हजार के बीच सैंपल की जांच हो रही है। यह अच्छी बात है। लेकिन जिस तरह कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ा अथवा बढ़ रहा है उसके हिसाब से जांच का दायरा और बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। बैकलॉग भी जल्द निपटना चाहिए। ताकि कोरोना के खिलाफ छिड़ी जंग में जीत मिल सके।

राज्य/केंद्र शासित -प्रति एक लाख आबादी पर सैंपलिंग

  • लद्दाख 5098
  • जम्मू-कश्मीर 3648
  • मणिपुर 2292
  • त्रिपुरा 2206
  • अरुणाचल 2208
  • सिक्किम 2041
  • मिजोरम 1490
  • हिमाचल प्रदेश 1425
  • नागालैंड1203
  • उत्तराखंड 922
  • मेघालय 750
  • (ग्यारह जुलाई तक)

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