कम तापमान भी बन रहा है जानलेवा! उम्रदराज लोगों पर मंडराया क्लाइमेट चेंज का सबसे बड़ा खतरा!

बीते कई सालों से पर्यावरण हम सभी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, पर अब यह हमारे समाज के सबसे बुजुर्ग तबके के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। हाल ही में, इसे लेकर एक शोध सामने आया है जिसके मुताबिक अगर वैश्विक तापमान में थोड़ी बहुत ही वृद्धि होती है तो उसका सीधा असर बुजुर्गों की सेहत पर देखने को मिलेगा।
यह शोध खासकर भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में रहने वाले लोगों के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं। आइए जानते हैं आखिर ढलती उम्र में तापमान का कम होना सेहत को इतना प्रभावित क्यों कर रहा है।
ग्लोबल वार्मिंग के तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ने से बुजुर्गों को खतरा
ग्लोबल वार्मिंग के तीन डिग्री सेल्सियस को पार करने से भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बुजुर्गों की एक बड़ी संख्या प्रभावित होगी, जो कुल प्रभावित जनसंख्या का 73 प्रतिशत या 1.5 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बताते चलें कि यह जानकारी द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में दी गई है।
इस अध्ययन में पाया गया है कि बुजुर्ग कम तापमान पर भी गर्मी से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर सकते हैं। इनमें भी खासकर दक्षिण एशिया और फारस की खाड़ी में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जहां बुजुर्गों को तीन महीने तक खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
बुजुर्गों की तापमान नियंत्रित करने की कम क्षमता बड़ी वजह
शोधकर्ताओं ने बताया कि उच्च तापमान और आर्द्रता के तहत बुजुर्ग अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में कम सक्षम होते हैं। पिछले शोध ने स्वस्थ युवाओं के मापों पर अधिक निर्भरता दिखाई है, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि कब तापमान मानव शरीर के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
जान लेने वाली बात यह है कि अध्ययन ने वैश्विक स्तर पर गर्मी सहने की उम्र से संबंधित भिन्नताओं को ध्यान में रखा है। इसके साथ ही लेखकों ने प्रभावित व्यक्तियों के आंकड़ों की भी जानकारी दी है और लिखा है कि भारत, चीन, पाकिस्तान व बांग्लादेश 1.48 अरब प्रभावित व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो वैश्विक कुल प्रभावित जनसंख्या का 72.6 प्रतिशत है। अध्ययन ने मध्य आयु और बुजुर्गों के लिए नए अनुभवजन्य असहनीय गर्मी की सीमाओं को प्रदान किया है।





