शरीर का ‘सिस्टम फेल’ कर सकती है लिवर की ये बीमारी

हमारे शरीर में लिवर एक ऐसा अंग है जो बिना थके और बिना कोई शिकायत किए लगातार काम करता रहता है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने के अलावा, इसका एक और बेहद खास काम है- खून का थक्का बनाने वाले जरूरी प्रोटीन का निर्माण करना।

जी हां, अगर किसी कारण से लिवर कमजोर पड़ जाए और ये प्रोटीन न बना पाए, तो छोटी-सी चोट लगने पर भी खून का बहना रुकता नहीं है। विज्ञान की भाषा में इस जटिल समस्या को ‘लिवर कोएगुलोपैथी’ कहा जाता है। आइए, डॉ. अमर दीप यादव (निदेशक एवं विभागाध्यक्ष, लिवर ट्रांसप्लांट और एचपीबी सर्जरी, शल्बी इंटरनेशनल हॉस्पिटल, दिल्ली) से इस बारे में डिटेल में समझते हैं।

जब लिवर काम करना बंद कर दे, तो शरीर में मचती है ये तबाही

सुनने में शायद ऐसा लगे कि लिवर खराब होने पर सिर्फ खून बहने का खतरा रहता है, लेकिन असलियत इससे भी ज्यादा खतरनाक है। हमारा लिवर सिर्फ खून का थक्का जमाने वाले तत्व ही नहीं बनाता, बल्कि नसों में खून को बेवजह जमने से रोकने वाले प्राकृतिक तत्व भी तैयार करता है।

इसलिए, जब लिवर काम करना बंद कर देता है, तो मरीज को एक साथ दो बड़े खतरे घेर लेते हैं:
पहला, चोट लगने पर भयंकर खून बहना
दूसरा, नसों के अंदर जानलेवा थक्के जम जाना

क्यों और कैसे पनपती है यह समस्या?
आजकल की खराब लाइफस्टाइल, वायरल बीमारियां और शरीर की अंदरूनी गड़बड़ियां लिवर को नुकसान पहुंचाने के मुख्य कारण हैं। जब लिवर बीमार होता है, तो खून के पूरे सिस्टम पर इसका गहरा असर पड़ता है:

जरूरी प्रोटीन की कमी: लिवर ‘फाइब्रिनोजेन’ और ‘प्रोथ्रोम्बिन’ जैसे खास प्रोटीन नहीं बना पाता, जो खून का थक्का जमाने के लिए पहली जरूरत हैं।
विटामिन K को न सोख पाना: खून को सही समय पर जमने के लिए ‘विटामिन K’ की दरकार होती है, लेकिन बीमार लिवर इसे शरीर में घुलने नहीं देता।
प्लेटलेट्स का गिरना: लिवर की बीमारी से शरीर की तिल्ली का आकार बढ़ जाता है। यह बढ़ी हुई तिल्ली खून में मौजूद प्लेटलेट्स को फंसाकर नष्ट करने लगती है, जिससे उनकी संख्या तेजी से गिर जाती है।
नसों में रुकावट का डर: शरीर में प्राकृतिक रूप से खून को पतला रखने वाले ‘प्रोटीन C’ और ‘प्रोटीन S’ की कमी हो जाती है, जिससे नसों में अवांछित थक्के बनने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

जानकारी की कमी और बढ़ता जोखिम
दुर्भाग्य से, बहुत कम लोग लिवर के इस जरूरी काम के बारे में जानते हैं। ज्यादातर लोग लिवर की खराबी को केवल शराब के सेवन या कमजोर हाजमे से जोड़कर देखते हैं। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि लिवर इतना सहनशील होता है कि यह अपनी बीमारी के शुरुआती संकेत नहीं देता। जब तक बीमारी पकड़ में आती है, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है।

बचाव के आसान और असरदार तरीके
इस छिपी हुई बीमारी को मात देने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आम लोगों के बीच रूटीन चेकअप और स्क्रीनिंग को बढ़ावा दिया जाए। अपने लिवर को तंदुरुस्त रखने के लिए आप कुछ बुनियादी कदम उठा सकते हैं:

बैलेंस डाइट लें: पोषण से भरपूर खाना खाएं जो लिवर पर दबाव न डाले।
शराब से पूरी तरह दूरी: लिवर को सुरक्षित रखने के लिए शराब का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
टीकाकरण करवाएं: हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों से बचने के लिए समय पर वैक्सीन लें।
नियमित चेकअप: डॉक्टर से मिलते रहें और अपने शरीर की रूटीन जांच कराते रहें।

लिवर कोएगुलोपैथी सिर्फ एक बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह इस बात का सुबूत है कि हमारे शरीर का हर हिस्सा एक-दूसरे पर कितना निर्भर है। लिवर की सेहत को नजरअंदाज करने से पूरे शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। इसके प्रति जागरूक रहना ही एक स्वस्थ और लंबी उम्र की असली चाबी है।

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