‘पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए शांत’, भारत की प्राचीन कपड़ा परंपरा वाले का‌र्ड्स लेकर अंतरिक्ष गए थे शुभांशु

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने नासा के एक्सिओम-4 मिशन पर अंतरिक्ष में भारत की प्राचीन कपड़ा परंपरा को दर्शाने वाले विशेष टेक्सटाइल कार्ड्स, ‘धरोहर डेक’, ले जाने का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 20 ग्राम का यह डेक हजारों वर्षों के ज्ञान और लचीलेपन का प्रतीक है। यह पीढ़ियों को जोड़ते हुए भारतीय कारीगरों की सदियों पुरानी कला और भारत की अंतरिक्ष यात्रा को श्रद्धांजलि देता है।

नासा के एक्सिओम-4 स्पेस मिशन के तहत पिछले वर्ष अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने रविवार को बताया कि वह अपने साथ भारत की सदियों पुरानी कपड़ा परंपरा को प्रदर्शित करने वाले टेक्सटाइल का‌र्ड्स का एक खास कलेक्शन लेकर गए थे।

शुभांशु ने ‘एक्स’ पर बताया कि इस ‘धरोहर डेक’ का वजन सिर्फ 20 ग्राम था। हजारों वर्षों का ज्ञान और लचीलापन का‌र्ड्स के रूप में पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए शांत, लेकिन शक्तिशाली रूप से इस बात का प्रमाण है कि हम कौन रहे हैं और क्या बनना चाहते हैं।

शुभांशु ने क्या कहा?
उन्होंने लिखा, ”हर कार्ड में भारत की प्रसिद्ध कपड़ा परंपरा का एक अंश है – इतिहास, स्मृति और कपड़े में बुनी गई महारत को महसूस करने का निमंत्रण। पीढ़ियों को जोड़ने के लिए डिजायन किया गया यह डेक सदियों पुरानी कारीगरी को प्रदर्शित करता है, साथ ही भारत की अंतरिक्ष में असाधारण यात्रा को दर्शाता है, जहां कला और विज्ञान मिलते हैं।’

उन्होंने कहा कि यह ‘धरोहर डेक’ भारतीय कारीगरों को एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने कभी दुनिया को कपड़े पहनाए थे।

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