आपका दिमाग सीमित न्यूरॉन्स से कर सकता है ढेर सारे काम, स्टडी में खुलासा

कभी सोचकर देखिए कि एक तरफ आप चाय की चुस्की ले रहे हैं और दूसरी तरफ ऑफिस का कोई काम या ऑनलाइन कोई क्लास, ये दोनों ही काम हम कितनी आसानी से कर पाते हैं। जबकि इसके पीछे हमारा दिमाग है जो न्यूरॉन्स की मदद से एक साथ कई कामों को करने में मदद करता है।
इसी को लेकर हाल ही में एक स्टडी की गई है कि आखिर हमारा यह छोटा सा दिमाग एक साथ इतने काम इतनी कुशलता से कैसे कर पाता है और हम दिमाग में इतनी सारी बातें कैसे याद रख पाते हैं।
अलग-अलग कार्यों के बीच स्विच करने में सक्षम होते हैं न्यूरान्स समूह
एक शोध से दिमाग में “मॉड्यूल” या न्यूरॉन्स के ऐसे समूह के होने का पहला सबूत मिला है, जो अलग-अलग कामों में एक ही तरह की प्रोसेसिंग करते हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि दिमाग कैसे कई तरह के काम करता है। शोधकर्ता ने प्रीफ्रंटल कार्टेक्स में ऐसे न्यूरॉन्स की पहचान की, जिनका इस्तेमाल वर्किंग मेमोरी में सेंसरी इनपुट या एक्शन प्लान को स्टोर करने के लिए किया जा सकता है।
हर जानकारी के लिए न्यूरान्स का अलग समूह नहीं रखता
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता युमा ओसाको ने इस बारे में कहा, “हमने पाया कि दिमाग हर तरह की जानकारी के लिए न्यूरॉन्स का अलग समूह नहीं रखता है। इसके बजाय, यह अलग-अलग तरह की जानकारी पर एक ही तरह की प्रोसेसिंग करने के लिए न्यूरॉन्स के उन्हीं समूह का इस्तेमाल करता है। इसका मतलब है कि न्यूरॉन्स का एक ही सबसेट वर्किंग मेमोरी में एक्शन और सेंसरी स्टिमुलस, दोनों को रख सकता है।” इसे सरल शब्दों में समझें तो यह शोध बताता है कि दिमाग सीमित क्षमता में भी असीमित तरीके से काम कर सकता है।
न्यूरॉन्स एक मल्टीटास्कर
शोधकर्ता का इसे लेकर कहना है कि दोबारा इस्तेमाल होने वाले सर्किट दिमाग को अलग-अलग तरह के व्यवहार करने के लिए कंपोनेंट्स को मिलाने और चुनने की सुविधा देते हैं। ओसाको ने कहा, “हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में हमें कई तरह की जानकारी को कुछ समय के लिए याद रखना पड़ता है। अब एक बड़ा सवाल यह है कि आखिर दिमाग सीमित संख्या में न्यूरॉन्स का इस्तेमाल करके जानकारी की असीमित विविधता को कैसे दिखा सकता है।”





