MP में अदालत के आदेश की अनदेखी SDM साहब को पड़ी महंगी, जानिए पूरा मामला…

मध्य प्रदेश के विदिशा में अदालत के आदेश का पालन नहीं करना एक एसडीएम साहब को काफी महंगा पड़ गया। कोर्ट ने सिरोंज एसडीएम हर्षल चौधरी के ऑफिस की कुर्सी, फर्नीचर, कंप्यूटर और प्रिंटर को कुर्क कर लिया है। दरअसल, करीब 13 साल पहले एमपी रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) द्वारा अधिग्रहित जमीन के लिए किसानों को मुआवजा देने के आदेश का पालन नहीं करने पर यह कार्रवाई हुई है।

पुलिस और अदालत के अधिकारियों ने 23 अप्रैल को कुर्की आदेश पर अमल किया। बुधवार और गुरुवार को एसडीएम ऑफिस बंद रहा। एसडीएम हर्षल चौधरी तब और मुसीबत में फंस गए जब उन्होंने कथित तौर पर उसी मामले में हाईकोर्ट में लंबित अपील के बारे में सोशल मीडिया पर बहस के दौरान प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि उनका इरादा ‘जनता का धन बचाना’ था। उन्होंन पोस्ट कर कहा, “अगर मैं भी अटैच करना है, तो मैं स्वेच्छा से तैयार हूं।”

कोर्ट को अपमानित करने का इरादा नहीं था : एसडीएम

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अब इस मामले में विदिशा की एक ट्रायल कोर्ट ने एसडीएम की पोस्ट को अवमानना मानते हुए हर्षल चौधरी को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। सूत्रों का कहना है कि उनके पोस्ट का स्क्रीनशॉट ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किया गया था।

चौधरी ने कहा कि मेरा इरादा अदालत को अपमानित करना नहीं था। मैंने बस एक बंद सोशल मीडिया ग्रुप में सर्कुलेट हो रहे कुछ गलत मैसेजों पर स्पष्टीकरण दिया और उन्हें हटा दिया। चौधरी ने कहा कि वकीलों ने जिला अदालत को हाईकोर्ट में अपील के बारे में सूचित किया था। एसडीएम ने कहा कि हम इस मामले पर सीनियर्स और कानूनी अधिकारियों से कानूनी सलाह ले रहे हैं। तेरह साल पहले जिला अदालत ने पांच किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया था। फिर 27 फरवरी 2023 को कोर्ट ने एक मामले में सिरोंज एसडीएम और एमपीआरडीसी को बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश दिया था। एमपीआरडीसी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां मामले की सुनवाई चल रही है। 

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