उत्तराखंड में है 100 साल पुराना abandoned अस्पताल

पहाड़ों में अक्सर भूत-प्रेत व आत्माओं की कहानी सुनने को मिलती है. एक तो पहाड़ों कि आबादी इतनी घनी नहीं होती और लोग भी कहीं न कहीं थोड़ी दूर-दूर फैले होते हैं और रात के वक़्त पहाड़ों में पसरा सन्नाटा हमें ये सोचने को मजबूर कर देता है कि यहां कुछ है. बहरहाल आज की हमारी कहानी भारत के उत्तराखंड के एक छोटे से इलाके एबट माउंट (Mount Abbot) की है जहां 100 साल से भी ज़्यादा पुराना एक abandoned अस्पताल है. इसके पास डॉक्टरों के लिए बंगला या स्टाफ क्वॉर्टर भी बना हुआ है. इसमें उस वक्त ब्रिटिशर अपने परिवार के साथ रहते थे, लेकिन अचानक एक दिन इस अस्पताल में ऐसा कुछ हुआ कि, उसके बाद से लोगों ने यहां आना बंद कर दिया और धीरे धीरे यह एक Haunted Hospital के नाम से जाना जाने लगा.

उत्तराखंड का पर्यटन विभाग कुमाऊं के औपनिवेशिक अतीत की इस दिलचस्प भूली-बिसरी निशानी को धीरे-धीरे फिर से जीवित कर रहा है, एबॉट माउंट आने वाले पर्यटकों को अब एक अनोखा हेरिटेज अनुभव मिलेगा।खूबसूरत कुमाऊं की पहाड़ियों में समुद्र तल से लगभग 6,400-7,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह ऐतिहासिक चर्च चीड़ और देवदार के जंगलों के बीच शांति से खड़ा है।इसे 1942 में जॉन हेरोल्ड एबॉट ने बनवाया था, जिन्होंने 20वीं सदी की शुरुआत में इस हिल स्टेशन को एक निजी यूरोपीय बस्ती के तौर पर विकसित किया था। कहा जाता है कि यह चर्च उनकी पत्नी की याद में बनाया गया था।अपने क्लासिक औपनिवेशिक अंदाज़, लकड़ी के इंटीरियर और सुंदर मेहराबदार खिड़कियों के साथ, यह चर्च ब्रिटिश-युग के हिल स्टेशनों की पुरानी दुनिया की खूबसूरती को दर्शाता है।

कभी ज़्यादातर बंद और बोर्ड से ढकी रहने वाली इस ऐतिहासिक औपनिवेशिक धरोहर को अब उत्तराखंड का पर्यटन विभाग फिर से ठीक कर रहा है। इस मरम्मत का मकसद कुमाऊं के औपनिवेशिक अतीत के इस हिस्से को फिर से जीवित करना और एबॉट माउंट आने वाले पर्यटकों के लिए हेरिटेज अनुभव को बेहतर बनाना है।

यहां मोरिस नाम के एक डॉक्टर परिवार के साथ आते हैं. उनकी डॉक्टरी काफी मशहूर थी. वह किसी भी मरीज़ को ठीक कर देते थे. लोग उनको भगवान या जादूगर मानने लगे. शुरुआत के कुछ महीनों तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक से डॉक्टर मोरिस की भविष्यवाणी मशहूर होने लगी. एक समय ऐसा आया कि डॉक्टर मोरिस मरीज़ों को देख भविष्यवाणी कर देते कि उसकी मौत इस तारीख को इतने बजे हो जाएगी और होता भी बिल्कुल वैसा ही था. गांव के लोग भोले भाले थे और अंधविश्वासी भी. उन्हें भी डॉक्टर मोरिस की बातों पर आंख बंद करके भरोसा होने लगा. कहा जाता है कि ऐसी 100 से ज़्यादा मौतें हकीकत में उसी टाइम पर उसी दिन हुईं, जो डॉक्टर मोरिस ने बताईं थीं

कहा जाता हैं की डॉ मोरिस एक बेहद काबिल और महत्वकांशी डॉक्टर थे. वह मेडिकल फील्ड में काफी आगे जाना चाहते थे. वह हमेशा यह सोचते या रिसर्च करते कि इंसान का दिल धड़कता कैसे है, इंसान का दिमाग सोचता कैसे है, क्यों इंसान के दिमाग अलग-अलग होते हैं और वो क्यों एक सा नहीं सोचते? इस तरह के सवाल डॉ. मोरिस के ज़हन में रहते थे. उनके इन्हीं बेतुके रिसर्च की वजह से मरीज़ की जान चली जाती थी. डॉ मोरिस जब मरीज़ की मौत की तारीख और समय बताते थे तो उसे अपनी एक डायरी में नोट करते और ठीक उसी समय वह उस मरीज़ को मार डालते और बाद में कमरे से सिर्फ लाश निकलती. जब डॉ. मोरिस की हरकत का खुलासा हुआ तो लोगों ने उन्हें Dr death बुलाना शुरू कर दिया. आज भी वो जगह डॉक्टर डेथ के बंगले के नाम से ही जाना जाता है.

धीरे-धीरे लोगों ने इस अस्पताल में आना बंद कर दिया और दूसरे अस्पतालों की ओर रुख करने लगे. नए डॉक्टरों के आने के बाद भी लोग वहां जाने से बचने लगे. इस हॉस्पिटल को लेकर लोगो ने कई तरह की बातें भी शुरू कर दीं. लोग कहने लगे कि अस्पताल से रात को चीखें निकलती हैं. अजीब-अजीब परछाइयां दिखती हैं. लोगों के रोने की आवाज़ें आती हैं. बाद में अस्पताल को भूतिया घोषित कर दिया गया. इसके बाद लोगों ने अस्पताल के पास मौजूद चर्च और कब्रिस्तान में भी जाना छोड़ दिय. वर्ष 2022 में भी वो बंगला मौजूद है और आज भी लोग उससे दूर रहते हैं. बाद में इस जगह को बेचने की भी कोशिश की गई लेकिन डर के मारे किसी की हिम्मत इसे खरीदने की नहीं हुई.

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