वायु प्रदूषण पर बांबे हाई कोर्ट के तीखे तेवर, कहा- अधिकारी भी उसी हवा में सांस ले रहे

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कड़ा संज्ञान लेने के बाद बांबे हाई कोर्ट ने भी इसका अनुसरण किया है। कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाते हुए बृहन्नमुंबई नगर निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।

कोर्ट ने वायु प्रदूषण से निपटने के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने पर साफ कहा कि अधिकारी भी उसी अशुद्ध हवा में सांस ले रहे हैं और किसी अजनबी दुनिया में नहीं रह रहे हैं। समस्या से निपटने के लिए वास्तविक और ईमानदार प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम की पीठ ने एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) में सुधार लाने के लिए कोर्ट के आदेश का अनुपालन न करने पर मुंबई और नवी मुंबई के नगर आयुक्तों का वेतन रोकने की चेतावनी भी दी।

इस मामले पर अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। गौरतलब है कि 2023 में कोर्ट ने शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण के मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी और साथ ही नगर निकायों और अन्य प्राधिकरणों को वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई निर्देश जारी किए थे।

बृहन्नमुंबई नगर निगम (बीएमसी) के वकील एसयू कामदार ने कोर्ट को बताया कि शहर में वायु प्रदूषण में कमी लाने के लिए नगर निकाय ने निर्माण साइटों और 600 अन्य साइटों पर काम रोकने का नोटिस जारी किया था। 400 जगहों पर एक्यूआइ मॉनिटर स्थापित किए गए हैं। कामदार के जवाब पर कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ।

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ये सभी कदम अदालत के आदेश की खानापूर्ति के लिए उठाए गए हैं। इतने वर्षों तक आप क्या कर रहे थे। हम यहां हर बार हालात का जायजा लेने के लिए नहीं बैठे हैं। अदालत का ये काम नहीं है कि वह नगर निगम को चलाए।

अदालत ने एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग के डाटा की विस्तृत रिपोर्ट तलब की और बीएमसी को निर्देश दिया कि वह नवंबर 2025 से तीन महीने पूर्व का दैनिक सेंसर डाटा प्रस्तुत करे। कोर्ट ने कहा कि हमें आंकड़े चाहिए। इसी से सही स्थिति पता चलेगी।

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