चीन की यात्रा करेंगे डोनल्ड ट्रंप, चिनफिंग से फोन पर बात के बाद…

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को अमेरिका आने का न्योता दिया और यूक्रेन, फेंटेनाइल जैसे मुद्दों पर चर्चा की। शी चिनफिंग ने ताइवान को मुख्यभूमि चीन का हिस्सा बताया। ट्रम्प ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सौदे की बात कही। जापान ने ताइवान के खिलाफ चीन के कदम पर हस्तक्षेप की बात कही।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का अप्रैल में बीजिंग आने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है और इसके बदले में उन्होंने चिनफिंग को अगले साल के अंत में अमेरिका की राजकीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है।ट्रंप ने यह घोषणा सोमवार सुबह शी चिनफिंग से फोन पर बात करने के कुछ घंटों बाद की। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन, फेंटेनाइल और सोयाबीन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। यह फोन दक्षिण कोरियाई शहर बुसान में दोनों नेताओं की आमने-सामने की मुलाकात के लगभग एक महीने बाद हुई।

शी चिनफिंग और ट्रंप के बीच फोन पर हुई बात
ट्रंप ने कहा कि चीन के साथ हमारे संबंध बेहद मजबूत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सोमवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग के साथ फोन पर बहुत अच्छी बातचीत हुई। नेताओं ने यूक्रेन में युद्ध, फेंटेनाइल तस्करी और किसानों के लिए समझौते पर चर्चा की।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सौदा तैयार किया: ट्रंप
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, हमने अपने किसानों के लिए एक अच्छा और बहुत महत्वपूर्ण सौदा किया है। यह और बेहतर होगा। चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी चिनफिंग ने ट्रंप से कहा कि ताइवान का मुख्यभूमि चीन में वापस आना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

सोमवार सुबह हुई दोनों नेताओं के बीच वार्ता
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सिर्फ यह पुष्टि की कि फोन सोमवार सुबह हुआ, लेकिन बातचीत के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा था कि अगर चीन ताइवान के खिलाफ कोई कदम उठाता है, तो जापान की सेना इसमें हस्तक्षेप कर सकती है। ताइवान एक स्वशासित द्वीप है, जिस पर चीन अपना दावा करता है। बातचीत के दौरान शी चिनफिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में एक साथ लड़ाई की थी, उन्हें युद्ध की जीत से मिले परिणामों की संयुक्त रूप से रक्षा करनी चाहिए।

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