नए साल में किस दिन पड़ेगी एकादशी

पद्म पुराण के अनुसार स्वयं महादेव ने नारद जी को उपदेश देते हुए कहा थाए एकादशी महान पुण्य देने वाली होती हैण् एकादशी प्रत्येक महीने में दो बार आती है एक शुक्ल पक्ष के बाद और दूसरी कृष्ण पक्ष के बाद आता है।

पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैंण् हिन्दू धर्म में ढेर सारे व्रत आदि किए जाते हैंए लेकिन इन सब में एकादशी का व्रत सबसे पुराना माना जाता हैण् आइए जानते है कि 2021 में कब और किस दिन एकादशी है।

धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन व्रत करने वालों के पितर नीच योनि से मुक्त हो जाते हैं और अपने परिवार वालों को आशीर्वाद देते हैंण् कहते हैं कि एकादशी का व्रत रखने वालों को धान्य.धान्य और पुत्र आदि की प्राप्ति होती हैण् मान्यता है कि एकादशी व्रत के प्रभाव से व्रती की कीर्ति बढ़ती है और जीवन खुशियों से भर जाता है।

एकादशी व्रत के दिन बरतें ये सावधानी
एकादशी का व्रत रोगों और कष्टों से मुक्ति दिलाता हैण् कहते हैं कि जो लोग एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं उन्हें इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए।

नये साल में कब.कब एकादशी व्रत
09 जनवरी दिन शनिवार. सफला एकादशी

24 जनवरी दिन रविवार. पौष पुत्रदा एकादशी

07 फरवरी दिन रविवार. षटतिला एकादशी

23 फरवरी दिन मंगलवार. जया एकादशी

09 मार्च दिन मंगलवार. विजया एकादशी

25 मार्च दिन गुरुवार. आमलकी एकादशी

07 अप्रैल दिन बुधवार .पापमोचिनी एकादशी

23 अप्रैल दिन शुक्रवार. कामदा एकादशी

07 मई दिन शुक्रवार. वरुथिनी एकादशी

23 मई दिन रविवार. मोहिनी एकादशी

06 जून दिन रविवार. अपरा एकादशी

21 जून सोमवार. निर्जला एकादशी

05 जुलाई सोमवार. योगिनी एकादशी

20 जुलाई दिन मंगलवार. देवशयनी एकादशी

04 अगस्त दिन बुधवार. कामिका एकादशी

18 अगस्त दिन बुधवार. श्रावण पुत्रदा एकादशी

03 सितंबर दिन शुक्रवार.अजा एकादशी

17 सितंबर दिन शुक्रवार. परिवर्तिनी एकादशी

02 अक्टूबर दिन शनिवार. इन्दिरा एकादशी

16 अक्टूबर दिन शनिवार. पापांकुशा एकादशी

01 नवंबर दिन सोमवार. रमा एकादशी

14 नवंबर दिन रविवार. देवुत्थान एकादशी

30 नवंबर दिन मंगलवार. उत्पन्ना एकादशी

14 दिसंबर दिन मंगलवार. मोक्षदा एकादशी

30 दिसंबर दिन गुरुवार. सफला एकादशी

एकादशी का महत्व
पुराणों के अनुसार एकादशी को ष्हरी दिनष् और ष्हरी वासरष् के नाम से भी जाना जाता हैण् इस व्रत को वैष्णव और गैर.वैष्णव दोनों ही समुदायों द्वारा मनाया जाता हैण् ऐसा कहा जाता है कि एकादशी व्रत हवनए यज्ञ ए वैदिक कर्म.कांड आदि से भी अधिक फल देता हैण् इस व्रत को रखने की एक मान्यता यह भी है कि इससे पूर्वज या पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती हैण् स्कन्द पुराण में भी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में बताया गया है।

जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है उनके लिए एकादशी के दिन गेहूंए मसाले और सब्जियां आदि का सेवन वर्जित होता हैण् भक्त एकादशी व्रत की तैयारी एक दिन पहले यानि कि दशमी से ही शुरू कर देते हैंण् दशमी के दिन श्रद्धालु प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करते हैं और इस दिन वे बिना नमक का भोजन ग्रहण करते हैं।

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