अपराधी ही नहीं, उनके परिवार को भी नहीं मिलेगा अमेरिका का वीजा

अमेरिका की ट्रंप प्रशासन ने आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम के तहत एक नए वीजा नियम की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य अरबों डॉलर की धोखाधड़ी करने वाले विदेशी आपराधिक नेटवर्कों को नष्ट करना है।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्कों रूबियो ने नई वीजा प्रतिबंध नीति का एलान करते हुए कहा कि यह प्रतिबंध न केवल अरबों डॉलर की ठगी करने वाले विदेशी अपराधियों पर लागू होगा, बल्कि उनके करीबी परिजनों को भी अमेरिका का वीजा नहीं मिलेगा।

रूबियो ने स्पष्ट किया कि नई नीति का मुख्य मकसद साइबर घोटालों और अवैध वसूली करने वाले गिरोहों पर नकेल कसना है, जिन्होंने लाखों अमेरिकी परिवारों की जीवन भर की कमाई छीनकर उन्हें बर्बाद कर दिया है।

अमेरिकी प्रशासन इन साइबर नेटवर्कों को पूरी तरह से ध्वस्त करने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए अपने सभी अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है। इसके लिए प्रतिबंध, कानूनी अभियोजन, संपत्ति की जब्ती, प्रत्यर्पण की मांग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उपयोग कर रहा है।

ट्रंप ने की थी मार्च में घोषणा

गौरतलब है कि अमेरिकी प्रशासन की यह घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप के मार्च में जारी किए गए उस आदेश पर आधारित है, जिसमें साइबर धोखाधड़ी के मामलों में अभियोजन को प्राथमिकता दी गई थी और एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने का निर्देश दिया गया था।

उस आदेश में साफ-साफ निर्देश दिया गया था कि ऐसे मामलों को बर्दाश्त करने वाले देशों को प्रतिबंधों, वीजा प्रतिबंधों, विदेशी सहायता पर रोक और दोषी अधिकारियों के निष्कासन का सामना करना पड़ सकता है।

चीनी साइबर नेटवर्क मुख्य सूत्रधार

एपॉक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने बयान में चीनी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों को ‘पिग बुचरिंग’जैसे ऑनलाइन साइबर घोटालों का मुख्य सूत्रधार बताया है। इन घोटालों में फर्जी ऑनलाइन रिश्तों और दोस्ती के जाल में फंसाकर लोगों को धोखाधड़ी वाले निवेश शामिल है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन साइबर गिरोहों ने साल 2024 में अमरीकी नागरिकों से कम से कम 10 अरब डॉलर ठगे। इसके अलावा, ये समूह भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई

मानव तस्करी और साइबर ठगी के मामले में अमेरिकी प्रशासन ने कंबोडिया के ‘प्रिन्स ग्रुप नेटवर्क’ से जुड़े 35 व्यक्तियों और संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।

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