86 हजार क्विंटल गेहूं की कमी के बाद अब बोरों की गुणवत्ता पर सवाल

सरकारी गोदामों में गेहूं की कमी का मामला सामने आने के बाद नागरिक आपूर्ति निगम ने भंडारण में इस्तेमाल हुए जूट के बोरे और पीपी बैग की गुणवत्ता की जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए अलग-अलग जिलों में अधिकारियों की टीम तैनात की गई है।

सरकारी गोदामों में गेहूं की कमी का मामला सामने आने के बाद अब नागरिक आपूर्ति निगम ने खाद्यान्न भंडारण में इस्तेमाल किए गए जूट के बोरे और पीपी (पॉलीप्रोपाइलीन) बैग की गुणवत्ता की जांच कराने का फैसला किया है। निगम के अध्यक्ष केपी यादव के निर्देश पर प्रबंध संचालक भास्कर लाक्षाकर ने अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं। निगम के अनुसार करीब 86 हजार क्विंटल गेहूं की कमी सामने आने के बाद यह शिकायतें मिली थीं कि खाद्यान्न की पैकिंग में इस्तेमाल किए गए बोरे और पीपी बैग की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी। इन्हीं शिकायतों की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

हालांकि सरकार के अनुसार, तुलाई, परिवहन और भंडारण के दौरान गेहूं में कुछ कमी आना सामान्य प्रक्रिया है। पिछले वर्षों में यह कमी औसतन 176 ग्राम प्रति क्विंटल थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 70 ग्राम प्रति क्विंटल रह गई है। खास बात यह है कि इस बार गेहूं की खरीदी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 30 प्रतिशत अधिक हुई, फिर भी कमी का स्तर कम रहा। सागर जिले में भी खरीदे गए गेहूं की जांच की जा रही है। वहां पिछले वर्षों में औसतन 510 ग्राम प्रति क्विंटल कमी रहती थी, जो इस वर्ष घटकर 318 ग्राम प्रति क्विंटल रह गई है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक नुकसान की भरपाई संबंधित जिम्मेदार पक्षों से कराई जाएगी।

तीन अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
जांच की निगरानी महाप्रबंधक (उपार्जन) के नेतृत्व में की जाएगी। अलग-अलग जिलों के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। एजीएम एस.सी. हेडाऊ सीहोर, उज्जैन और रतलाम जिलों की जांच करेंगे। एजीएम ज्योति चोकसे विदिशा, नर्मदापुरम और देवास की जांच की जिम्मेदारी संभालेंगी। प्रबंधक हेमराज मोरे भोपाल, रायसेन और नरसिंहपुर जिलों में जांच करेंगे।

जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
जांच टीम यह पता लगाएगी कि खाद्यान्न की पैकिंग में इस्तेमाल किए गए बोरे और पीपी बैग निर्धारित गुणवत्ता के थे या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं खराब गुणवत्ता के कारण गेहूं के भंडारण और परिवहन के दौरान नुकसान तो नहीं हुआ। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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