यूपी-गुजरात से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल तक बारिश ने मचाई तबाही, सैकड़ों रास्ते बंद

देशभर में मानसून ने भीषण तबाही मचाई है। भारी बारिश के कारण देश के अलग-अलग राज्यों से जलभराव, भूस्खलन और घर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसके कारण कई लोगों की जान भी चली गई है।

सिर्फ दिल्ली में गुरुवार को चार लोगों की मौत हो गई। जबकि यूपी में 19 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, 7 जुलाई को वायनाड में हुए भूस्खलन में मरने वालों की संख्या गुरुवार को बढ़कर छह हो गई है।

उत्तराखंड सबसे अधिक प्रभावित

भारी बारिश के कारण सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में उत्तराखंड है। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भूस्खलन से सड़कें बाधित हो गईं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में जलभराव से कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए। 107 संपर्क मार्ग भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हैं। जिसके कारण चारधाम यात्रा भी प्रभावित हो रही है।

उत्तरांखड में आज भी रेड अलर्ट

मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए भी उत्तरांखड के कई जिलों में भारी वर्षा को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। अलर्ट को देखते हुए देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चंपावत और बागेश्वर में शुक्रवार को 12 वीं तक के सभी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर किया गया है। उत्तरांखड में 107 संपर्क मार्ग भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हैं।

हिमाचल में 75 सड़कें बंद

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में गुरुवार को भारी बारिश के कारण आई अचानक बाढ़ ने 100 फुट लंबे लोहे के पुल को डुबो दिया, जिससे कुछ गांव पूरी तरह से कट गए। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, गुरुवार देर शाम तक बारिश की वजह से 75 सड़कें बंद हो गईं।

यूपी में कम से कम 19 लोगों की मौत

बारिश और व्रजवात के कारण उत्तर प्रदेश में 19 लोगों की मौत हो गई। इनमें इंदिरापुरम के ज्ञानखंड स्थित एक पार्क में वर्षा के दौरान ट्रांसफार्मर में करंट उतरने से सोसायटी के एक चौकीदार की जान चली गई।

बुलंदशहर में मकान की दीवार गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई, जबकि गाजियाबाद में घर के बाहर जल भराव में डूबकर तीन वर्षीय बच्ची और नाले में गिरने से सात वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। वहीं, पूर्वांचल के चार जिलों में वज्रपात से सात लोगों की मौत हो गई।

राजस्थान में 6 ट्रेनें कैंसिल

राजस्थान के धौलपुर में बारिश के चलते मकान ढह गया और 6 लोग मलबे में दब गए। अजमेर के किशनगढ़ में भी कच्चा मकान ढहने से माता-पिता और बच्चा दब गए। मानसूनी बारिश के कारण राजस्थान में 6 ट्रेनें कैंसिल हुई हैं। कई ट्रेनें लेट भी हैं।

दिल्ली-एनसीआर का मौसम

लगातार हो रही बारिश के कारण दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर जलभराव हो गया, जिसके कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और कई जगहों पर घंटों तक भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिला।

बारिश के बाद नई दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर के पास NH-24 पर लगा जाम। (फोटो- ANI)

खमीरपुर खुरेजी में जहां 24 घंटे के दौरान सबसे ज्यादा 160 मिमी वर्षा दर्ज की गई वहीं अन्य कई इलाकों में भी 24 से 30 घंटे के दौरान यह आंकड़ा 100 मिमी से ज्यादा का रहा।

दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र ने 9 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे तक के 30 घंटों में 105 मिमी बारिश दर्ज की। इससे पहले पिछले 24 घंटों में 14.2 मिमी बारिश हुई थी। हालांकि, शुक्रवार से वर्षा का दौर थोड़ा थमने और मौसम एक बार फिर शुष्क होने का पूर्वानुमान है।

गुजरात में 9 लोगों की मौत

गुजरात में भी लगातार हो रही बारिश से तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। गुजरात के सूरत में बारिश से जुड़ी घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि बाढ़ जैसे हालात के बीच करीब 3,900 लोगों को निचले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

महाराष्ट्र का मौसम

अगर बात करें महाराष्ट्र के मौसम की तो रायगढ़ जिले में बाढ़ के दौरान एचपीसीएल के बाटलिंग प्लांट से करीब 3,000 गैस सिलेंडर पातालगंगा नदी में बह गए।

वहीं, पुणे में इमारत के मलबे से गुरुवार को एनडीआरएफ की टीम ने एक शव निकाला। अब तक नौ लोगों को बचाया गया है। यहां अभी भी छह से सात लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है।

मुंबई में भारी बारिश के कारण लोकल ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और कई इलाकों में पानी भर गया। शुक्रवार सुबह ऊंची लहरें मुंबई के मरीन ड्राइव से टकराईं।

एमपी में धीमी पड़ी मानसून की रफ्तार

एक तरफ जहां देशभर में झमाझम बारिश देखने को मिल रही है, वहीं, मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियों पर अगले तीन से चार दिनों के लिए धीमी पड़ने वाली है। मानसून द्रोणिका (ट्रफ लाइन) के उत्तर प्रदेश की तरफ शिफ्ट होने के कारण शुक्रवार से प्रदेश में वर्षा के दौर में कमी आएगी।

मौसम केंद्र ने शुक्रवार को केवल पन्ना और सतना जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के बाकी हिस्सों में सिर्फ गरज-चमक के साथ छुटपुट बौछारें पड़ने की संभावना जताई है।

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