फिटनेस के लिए दौड़ना शुरू करना चाहते हैं तो डॉक्टर से जानें सही तरीका

सुबह-शाम की सैर करते समय अक्सर कुछ लोग दौड़ लगाते नजर आते हैं। उन्हें देखते ही सहसा हो ध्यान उनकी फिटनेस पर जाता है। उनका सुडौल शरीर और फिट अंदाज देखकर यदि आप भी दौड़ने को योजना बनाना चाहते हैं तो यह एक बेहतर निर्णय हो सकता है। 

इन दिनों जब हमारी दिनचर्या लगभग निष्क्रियता भरी हो गई है ऐसे में किसी दिन कुछ किमी. की मैराथन दौड़ भी आपको शानदार अनुभव दे सकता है। यदि आने वाले समय में दौड़ना शुरू करना चाहते हैं तो सबसे पहले फिटनेस, दिनचर्या में कितना समय दे सकते हैं, इन बातों के साथ क्या-क्या जोखिम हो सकता है, दौड़ने के लिए कैसा आहार हो, जूते कैसे हों अदि पर भी ध्यान देना उतना ही जरूरी है। 

आंतें रहें स्वस्थ

पेट स्वस्थ है तो इससे शरीर की हर गतिविधि पर अच्छा असर होता है। जर्नल आफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, पेट का माइक्रोबायोम सूजन व स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है साथ ही इससे तीव्र व्यायाम जैसे दौड़ते समय होने वाली ऊर्जा खपत, हाइड्रेशन व मेटाबालिज्म में सुधार करता है।

इसका अर्थ है आप दौड़ते समय भी थकान महसूस नहीं करते और ऊर्जा बनी रहती है और फिटनेस में जल्द सुधार होता है। हमारी आंतों की सेहत का प्रतिरोधक क्षमता से गहरा नाता है। इसलिए ऐसा भोजन करना चाहिए जिससे आंतों में मौजूद बैक्टीरिया स्वस्थ रहें। आपको बीमारियों के कारण दौड़ने में परेशानी न हो। 

मोबिलिटी रहेगी अच्छी

मोबलिटी यानी गतिशीलता। आपको चलने-फिरने में कठिनाई होती है तो इसका अर्थ है आपकी मांसपेशियां ही अस्वस्थ नहीं, बल्कि मोबिलिटी भी कमजोर है। उम्र बढ़ने पर मोबिलिटी कमजोर होना सामान्य है, लेकिन यदि लंबे समय तक निष्क्रियता रहती है तो आपको सुबह बिस्तर से उठने से लेकर चलने या सीढ़ियां चढ़ने में ही कठिनाई नहीं होगी, बल्कि चोट लगने की आशंका भी बढ़ सकती है। एक अच्छे बॉडी पोश्चर के लिए मोबिलिटी की जरूरत होती है। नियमित दौड़ मोबिलिटी को बेहतर करने के लिए बहुत आवश्यक है।

चिकित्सक से रहे संपर्क

यदि उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रोल का उच्च स्तर, हृदय से जुड़ी परेशानियां आदि हैं तो आपको दौड़ना चुनने से पूर्व किसी चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। घुटनों, एड़ियों में दर्द या अर्थराइटिस है तो ऐसी स्थितियों में चिकित्सक बताएंगे कि दौड़ना है या नहीं। वे दौड़ के अतिरिक्त दूसरी गतिविधि का सुझाव दे सकते हैं।

तकनीकी पहलू की न करें अनदेखी

डॉ. आशीष आचार्य (आर्थोपेडिक्स व स्पोर्ट्स मेडिसिन, सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली) बताते हैं कि  20-30 की उम्र में दौड़ या रनिंग करने से शरीर को एक निश्चित स्वरूप में ढालने में अपेक्षाकृत कम मेहनत लगती है, पर एक प्रक्रिया व निश्चित रणनीति हो तो आप 40-50 की उम्र में भी दौड़ने या लंबी दूरी वाली मैराथन कर सकते हैं।

हालांकि, इसके लिए आपको एक प्रशिक्षक की मदद लेनी पड़ सकती है, जो यह बताएंगे कि नियमित दौड़ने के लिए पहले टहलना, इसके बाद तेज गति से टहलना, जैसे ब्रिस्क वाक, जागिंग से शुरुआत करें। हर दिन इनके लिएतय समय रखें । हरेक गतिविधि के लिए अलग प्रशिक्षण व प्रक्रिया होती है। उनका पालन करें तो चोट लगने या किसी अन्य जोखिम की आशंका कम हो सकती है।

इन बातों का रहे ध्यान

कम से कम छह माह में शरीर दौड़ या मैराथन के लिए तैयार हो सकता है। हालांकि यह व्यक्तिगत क्षमता और प्रतिबद्धता पर भी निर्भर है।
सुनिश्चित करें कि हर बार गतिविधि शुरू करने से पहले वार्मअप और स्ट्रेचिंग करें। वापस आने पर हल्के स्ट्रेच के बाद कूलिंग करें।
दौड़ने या किसी गतिविधि के बाद पेट, घुटना या एड़ियों आदि में दर्द है या किसी दिन दौड़ने का मन नहीं करता तो शरीर के इन संकेतों को अनदेखा न करें।
निर्धारित समय में अपेक्षित लक्ष्य न पा सकें तो भी तनाव नहीं लेना चाहिए।


खानपान का ध्यान
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और गुड फैट के बढ़िया स्रोत साबुत अनाज, दालें नियमित लें ।
मौसमी फल और सब्जियां ( हरी और पीली) पर्याप्त मात्रा में लें।
ब्राउन राइस, कम वसा युक्त दूध और इससे बने विभिन्न उत्पाद जैसे कि काटेज चीज, दही, छाछ, सोया दूध और टोफू, अंडे, मछली आदि लेना चाहिए।
हाइड्रेशन न भूलें
दौड़ने से निकलने वाला पसीना शरीर के इलेक्ट्रोलाइट को तेजी से कम कर सकता है। इसलिए डिहाइड्रेशन की आशंका से बचाव के लिए इलेक्ट्रोलाइट संतुलित रखें। इलेक्ट्रोलाइट लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखता है।

इन्हें न करें अनदेखा
दौड़ने से पूर्व ध्यान दें कि इसमें कोई जल्दबाजी न हो। हर दिन, सप्ताह, माह के लिए एक लक्ष्य हो ।
उबड़-खाबड़ सतह पर दौड़ने से चोट लगने या गिरने का जोखिम बढ़ सकता है । इसलिए हमेशा समतल जमीन पर दौड़ना चुनें।
दौड़ने के लिए जूते सही हों ताकि शरीर का दबाव केवल पैरों पर रहे और आप लंबे समय तक आराम से दौड़ सकें। यदि ऐसा न होता तो कभी एड़ियों तो कभी कंधे पर दबाव होगा और आपको चोट लग सकती है या दर्द से परेशान हो सकते हैं।

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